डॉ हितेश गबेल एवं डॉ निशांत अवस्थी पर कार्यवाही की मांग डेंटल क्लिनिक बना मौत का अड्डा! दांत के इलाज में गले में छोड़ा गया स्टील तार
डॉ हितेश गबेल एवं डॉ निशांत अवस्थी पर कार्यवाही की मांग डेंटल क्लिनिक बना मौत का अड्डा! दांत के इलाज में गले में छोड़ा गया स्टील तार
खरसिया
खरसिया क्षेत्र से सामने आया यह मामला न सिर्फ चिकित्सा लापरवाही है, बल्कि यह मानव जीवन के साथ किया गया घिनौना प्रयोग प्रतीत होता है। दांत के इलाज के नाम पर मरीज के गले में स्टील तार का टुकड़ा छोड़ देने का सनसनीखेज आरोप सामने आया है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी है।
पीड़ित अमन साहू, निवासी ग्राम चुरतेला (जिला सक्ती) ने पुलिस चौकी खरसिया में दर्ज शिकायत में बताया कि हरि दंत चिकित्सालय, महका रोड, खरसिया में डॉ. निशांत अवस्थी द्वारा इलाज किया जा रहा था। 13 अक्टूबर 2025 को दांत का इलाज किया गया, जिसे “पूर्ण” बताया गया, लेकिन वास्तविकता यह थी कि नीचे के दो दांत अधूरे छोड़े गए। जब इस पर सवाल उठाया गया तो मरीज को रायगढ़ बुलाकर 300-300 रुपये का अतिरिक्त चार्ज ठोका गया।
सबसे चौंकाने वाली और भयावह घटना 06 दिसंबर 2025 को सामने आई, जब इलाज के दौरान मरीज के मुंह में स्टील तार का टुकड़ा जानबूझकर छोड़ दिया गया। आरोप है कि यह तार गले में इस तरह छोड़ा गया था कि वह पेट की नली में जाकर जानलेवा साबित हो सकता था। इलाज के बाद जैसे ही मरीज क्लिनिक से बाहर निकला, गले में तेज जलन और कुछ फंसा होने का अहसास हुआ। खांसने पर जो निकला, उसने सबको हिला दिया—स्टील का नुकीला तार!
यदि यह तार पेट में चला जाता, तो गंभीर आंतरिक रक्तस्राव, आंत फटने और मौत तक की नौबत आ सकती थी। सवाल यह है कि क्या यह केवल लापरवाही थी, या फिर मरीज की जान से खेलने की सोची-समझी साजिश?
जब इस गंभीर घटना की शिकायत क्लिनिक में की गई, तो डॉक्टरों ने शर्मसार होने के बजाय इसे “नॉर्मल प्रोसेस” बताकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। यही नहीं, पीड़ित के साथ बदतमीजी की गई, धमकाया गया और खुद को राजनीतिक रसूख वाला बताते हुए बीजेपी नेता होने का रौब दिखाया गया। शिकायत करने पर क्लिनिक में हंगामा करने का झूठा आरोप भी मढ़ दिया गया।
हद तो तब हो गई जब पीड़ित से 20 हजार रुपये जबरन जमा करवा लिए गए और कहा गया कि अगर कहीं और इलाज कराना है तो दोबारा पूरी फीस देनी पड़ेगी। यह सीधा-सीधा आर्थिक शोषण और दबाव बनाने की कार्रवाई है।
यह मामला निजी डेंटल क्लीनिकों की मनमानी, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और मरीजों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या बिना निगरानी के ऐसे क्लिनिक मरीजों की जिंदगी से खेलते रहेंगे? क्या रसूख और पैसे के दम पर डॉक्टर कानून से ऊपर हो गए हैं?
पीड़ित ने डॉ. निशांत अवस्थी और डॉ. हितेश गवेल के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब जिम्मेदारी प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की है कि वे इस मामले को साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य मानते हुए सख्त कार्रवाई करें, ताकि भविष्य में किसी और की जिंदगी दंत कुर्सी पर दांव पर न लगे।

संपादक – जनबन्धु समाचार
